અટકે જો આંસુ તો ખટકે; ને લ્હાય મને
થીજેલાં બિંદુઓ જો ખાળું!
“If tears cease, they prick; and a fire consumes me through,Should I hold back these frozen drops from view!”
— सुरेश दलाल
अर्थ
अगर आँसू रुकते हैं तो वे चुभते हैं; और मुझे आग लग जाती है, यदि मैं इन जमे हुए बूँदों को रोके रखूँ!
विस्तार
यह दोहा भावनाओं को दबाने के दर्द को खूबसूरती से दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि यदि आँसू रुक जाएँ या उन्हें रोका जाए, तो इससे राहत नहीं मिलती, बल्कि अंदर एक चुभन और जलन महसूस होती है। कवि का अर्थ है कि अपने दुखों या 'जमे हुए बूँदों' को दबाने से पीड़ा और बढ़ जाती है। यह एक मार्मिक याद दिलाता है कि कभी-कभी भावनाओं को बहने देना, यहाँ तक कि आँसुओं को भी, आंतरिक उपचार के लिए महत्वपूर्ण है और यह एक गहरे, अधिक दर्दनाक आंतरिक संघर्ष को रोकता है।
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