मा'नी को भुला देती है सूरत है तो ये है नेचर भी सबक़ सीख ले ज़ीनत है तो ये है

“If form be such, it makes the heart forget all inner thought; If grace be such, from this very charm could Nature's lessons be taught.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर कोई रूप या सूरत है तो वह ऐसी है जो अर्थ और वास्तविकता को भी भुला देती है, और यदि कोई सुंदरता या सजावट है तो वह ऐसी है जिससे स्वयं प्रकृति भी सबक़ ले सकती है।

विस्तार

शायर महबूब के हुस्न की तारीफ़ में सादगी और हैरत का एक अनोखा रंग भरता है। वह कहता है कि उनका चेहरा इतना दिलकश है कि उसे देखकर इंसान अंदरूनी मानी और फलसफे सब भूल जाता है—अगर कोई सूरत मुकम्मल है, तो बस यही है। इस हुस्न का निखार इतना कुदरती और बेमिसाल है कि खुद कुदरत भी इससे खूबसूरती और संवरने का हुनर सीख सकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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