“If form be such, it makes the heart forget all inner thought; If grace be such, from this very charm could Nature's lessons be taught.”
अगर कोई रूप या सूरत है तो वह ऐसी है जो अर्थ और वास्तविकता को भी भुला देती है, और यदि कोई सुंदरता या सजावट है तो वह ऐसी है जिससे स्वयं प्रकृति भी सबक़ ले सकती है।
शायर महबूब के हुस्न की तारीफ़ में सादगी और हैरत का एक अनोखा रंग भरता है। वह कहता है कि उनका चेहरा इतना दिलकश है कि उसे देखकर इंसान अंदरूनी मानी और फलसफे सब भूल जाता है—अगर कोई सूरत मुकम्मल है, तो बस यही है। इस हुस्न का निखार इतना कुदरती और बेमिसाल है कि खुद कुदरत भी इससे खूबसूरती और संवरने का हुनर सीख सकती है।
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