न हासिल हुआ सब्र-ओ-आराम दिल का न निकला कभी तुम से कुछ काम दिल का

“Neither did this heart attain patience and peace, nor from you was any purpose of the heart ever fulfilled.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

न तो दिल को कभी सब्र और सुकून मिल सका, और न ही कभी तुम्हारे ज़रिए दिल का कोई काम या मक़सद पूरा हुआ।

विस्तार

यह शेर दिल की उस गहरी बेबसी और ख़ालीपन को बयां करता है, जहाँ इश्क़ में सब कुछ लुटाकर भी कुछ हासिल नहीं होता। शायर एक दर्द भरी शिकायत के साथ कहता है कि न तो महबूब से वफ़ा या तसल्ली मिली, और न ही दिल को सब्र और चैन नसीब हुआ। यह उस दोतरफ़ा नाकामी का अहसास है, जहाँ इंसान चाहत के रास्ते पर चलकर केवल बेचैनी और अधूरेपन के भंवर में फँसकर रह जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

1 / 11Next →