ग़ज़ल

न हासिल हुआ सब्र-ओ-आराम दिल का

نہ حاصل ہوا صبر و آرام دل کا
अकबर इलाहाबादी· Ghazal· 11 shers· radif: दिल का

इस ग़ज़ल में दिल की बेचैनी और महबूब की बेरुखी से उपजी निराशा को व्यक्त किया गया है। तमाम नाकामियों और तड़प के बावजूद, शायर का दिल हमेशा इश्क़ की मस्ती और गहरे प्रेम के खुमार में डूबा रहता है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
न हासिल हुआ सब्र-ओ-आराम दिल का न निकला कभी तुम से कुछ काम दिल का
न तो दिल को कभी सब्र और सुकून मिल सका, और न ही कभी तुम्हारे ज़रिए दिल का कोई काम या मक़सद पूरा हुआ।
2
मोहब्बत का नश्शा रहे क्यूँ न हर-दम भरा है मय-ए-इश्क़ से जाम दिल का
मोहब्बत का नशा हर समय क्यों न रहे, जब दिल का प्याला इश्क़ की शराब से पूरी तरह भरा हुआ है।
3
फँसाया तो आँखों ने दाम-ए-बला में मगर इश्क़ में हो गया नाम दिल का
मुसीबत के जाल में तो आँखों ने फँसाया था, लेकिन इश्क़ में नाम दिल का हो गया।
4
हुआ ख़्वाब रुस्वा ये इश्क़-ए-बुताँ में ख़ुदा ही है अब मेरे बदनाम दिल का
महबूबों के इश्क़ में यह दिल ज़लील और रुसवा हो गया है, अब मेरे इस बदनाम दिल का सहारा सिर्फ़ ख़ुदा ही है।
5
ये बाँकी अदाएँ ये तिरछी निगाहें यही ले गईं सब्र-ओ-आराम दिल का
ये बाँकी अदाएँ और ये तिरछी निगाहें ही मेरे दिल का सब्र और चैन छीन कर ले गई हैं।
6
धुआँ पहले उठता था आग़ाज़ था वो हुआ ख़ाक अब ये है अंजाम दिल का
शुरुआत में सिर्फ़ धुआँ उठ रहा था, जो केवल आग़ाज़ था; अब यह दिल जलकर राख हो चुका है और यही इसका अंतिम अंजाम है।
7
जब आग़ाज़-ए-उल्फ़त ही में जल रहा है तो क्या ख़ाक बतलाऊँ अंजाम दिल का
जब मोहब्बत की शुरुआत में ही दिल जल रहा है, तो फिर मैं इसके अंतिम अंजाम के बारे में क्या ख़ाक बताऊँ।
8
ख़ुदा के लिए फेर दो मुझ को साहब जो सरकार में कुछ न हो काम दिल का
हे मालिक, ख़ुदा के वास्ते मुझे वापस लौटा दीजिए, अगर आपके दरबार में दिल का कोई काम नहीं है।
9
पस-ए-मर्ग उन पर खुला हाल-ए-उल्फ़त गई ले के रूह अपनी पैग़ाम दिल का
मेरी मौत के बाद ही उन पर मेरे प्यार की हालत ज़ाहिर हुई, जब मेरी रूह ख़ुद मेरे दिल का पैग़ाम लेकर गई।
10
तड़पता हुआ यूँ न पाया हमेशा कहूँ क्या मैं आग़ाज़-ओ-अंजाम दिल का
मैंने अपने दिल को हमेशा इस तरह तड़पते हुए नहीं देखा; अब मैं दिल की शुरुआत और उसके अंजाम के बारे में क्या कहूँ।
11
दिल उस बे-वफ़ा को जो देते हो 'अकबर' तो कुछ सोच लो पहले अंजाम दिल का
हे अकबर, अगर तुम अपना दिल उस बेवफ़ा को दे रहे हो, तो पहले अपने दिल के अंजाम के बारे में कुछ सोच लो।
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