“Smoke rose at first, that was only the start; Now turned to ash, such is the fate of this heart.”
शुरुआत में सिर्फ़ धुआँ उठ रहा था, जो केवल आग़ाज़ था; अब यह दिल जलकर राख हो चुका है और यही इसका अंतिम अंजाम है।
शायर यहाँ दिल के दर्द और बर्बादी को आग और राख के रूपक से बड़ी सादगी से बयां कर रहे हैं। शुरुआत में जब इश्क़ या ग़म की आग सुलगती थी, तो आहों और तड़प का धुआँ उठता था, जो बेचैनी की निशानी थी। लेकिन अब वह आग सब कुछ जलाकर ख़ाक कर चुकी है—दिल पूरी तरह मिट चुका है और अब उसमें तड़पने की ताक़त भी नहीं बची, यही उसका आख़िरी अंजाम है।
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