“For God's sake, turn me back and let me go, my lord, if in your royal court there is no employment for a heart.”
हे मालिक, ख़ुदा के वास्ते मुझे वापस लौटा दीजिए, अगर आपके दरबार में दिल का कोई काम नहीं है।
इस शेर में शायर ने महबूब को एक हाकिम की तरह पेश किया है और ख़ुद को एक ऐसा मुसाफ़िर या दरबारी माना है, जो सिर्फ़ अपना दिल लेकर उनकी चौखट पर हाज़िर हुआ है। वह बड़े दर्द और सादगी से कहता है कि अगर आपकी इस हुकूमत में जज़्बातों और प्यार की कोई जगह या काम ही नहीं, तो ख़ुदा के लिए मुझे वापस लौटा दीजिए। यह बेवजह की उम्मीद में तड़पने के बजाय अपनी मुहब्बत को इज़्ज़त के साथ समेट लेने की एक मार्मिक फ़रियाद है।
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