तअ'ज्जुब आता है तिफ़्ल-ए-दिल पर कि हो गया मस्त-ए-नज़्म-ए-'अकबर' अभी मिडिल पास तक नहीं है बहुत से हैं इम्तिहान बाक़ी

“I marvel at this childish heart, already drunk on the verse of Akbar; it hasn't even passed middle school yet, and so many exams still lie ahead.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मुझे अपने नादान दिल पर अचरज होता है कि वह अभी से 'अकबर' की शायरी में मस्त हो गया है। अभी तो इसने मिडिल स्कूल भी पास नहीं किया है और आगे कई इम्तिहान बाकी हैं।

विस्तार

अकबर इलाहाबादी यहाँ अपने नादान दिल पर चुटकी लेते हुए कहते हैं कि यह कच्चा दिल अभी से शायरी और जज़्बातों की मस्ती में डूब गया है। जैसे कोई छोटा बच्चा मिडिल स्कूल पास किए बिना ही बड़ा आदमी बनने के ख़्वाब देखने लगे, वैसे ही दिल ज़िंदगी के कड़े इम्तिहानों का सामना किए बिना ही इश्क़ के सुरूर में बहक रहा है। यह शेर तालीम के नए दौर की शब्दावली का इस्तेमाल करके दिल की मासूम जल्दबाज़ी को बेहद मुस्कुराते हुए अंदाज़ में बयान करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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