“These eyes remain solely to witness the spectacle of my ruin; these ears survive only to hear words that steal my wits away.”
ये आँखें सिर्फ़ इसलिए बची रह गई हैं ताकि मेरे बर्बाद होने का तमाशा देख सकें, और ये कान सिर्फ़ इसलिए बाक़ी हैं ताकि मैं होश उड़ा देने वाली बातें सुन सकूँ।
शायर यहाँ एक गहरे दर्द और बेबसी को बहुत तल्ख़ अंदाज़ में बयां कर रहे हैं। उनका मानना है कि उनके जिस्म में आँखें और कान ज़िंदगी की खूबसूरती महसूस करने के लिए नहीं बचे, बल्कि सिर्फ़ अपनी ही बर्बादी का तमाशा देखने और दिल दहला देने वाली बातें सुनने के लिए बाकी हैं। यह शेर इश्क़ और ज़िंदगी के उस मुक़ाम की तस्वीर खींचता है जहाँ ज़िंदा रहना कोई नेमत नहीं, बल्कि अपने ही ख़ात्मे का गवाह बनने की सज़ा जैसा लगता है।
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