“At the sight of the wine's rich hue, my resolve was undone; the preacher's counsel fell aside, the cupbearer won.”
शराब का रंग देखकर मेरी नीयत बदल गई; उपदेशक की सीख धरी की धरी रह गई और साक़ी की बात चल निकली।
इस खूबसूरत शेर में शायर ने वाइज़ (उपदेशक) के सूखे प्रवचनों और ज़िंदगी की दिलकश रंगीनियों के बीच की कशमकश को पेश किया है। हो सकता है कि आशिक़ ने नेकी और संयम का पक्का इरादा कर लिया था, लेकिन शराब की लाली और साक़ी की प्यार भरी अदा के आगे वह सब बिखर गया। यह शेर बड़े सरल ढंग से दिखाता है कि जब दिल को छू लेने वाली खूबसूरती और मोहब्बत सामने आती है, तो खोखले उपदेश धरे के धरे रह जाते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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