“Great was their longing to see their daughter rise and grow; / But once the veil was lifted, away did she finally go.”
उन्हें अपनी बेटी की तरक़्क़ी की बहुत चाहत थी, लेकिन जब पर्दा हटा तो वह आख़िरकार घर और दायरे से बाहर निकल गई।
यह शेर पुरानी तहज़ीब और आधुनिकता के टकराव पर एक बेहद तीखा और चुटीला तंज़ है। माता-पिता अपनी बेटी की तरक़्क़ी की चाहत तो रखते थे, लेकिन शायर ने 'पर्दा उठने' और 'निकल जाने' के मुहावरे में गहरी दोहरी बात कह दी है। एक तरफ़ जहाँ लड़की बंदिशों से आज़ाद होकर दुनिया में अपना मुक़ाम बनाने निकल पड़ी, वहीं रूढ़िवादी सोच के लिए वह हाथ से 'निकल गई'। यह उस सामाजिक विरोधाभास को हल्के-फुल्के अंदाज़ में सामने लाता है जहाँ लोग बदलाव तो चाहते हैं, पर उसके नतीजों से घबराते हैं।
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