“Along love's path, I find no soul accomplished and complete; Farhad and Majnun are gone, now none is there my heart would meet.”
इश्क़ के रास्ते में मुझे कोई भी परिपूर्ण प्रेमी नहीं मिलता; फ़रहाद और मजनूँ के चले जाने के बाद अब मेरा दिल किसी से मेल नहीं खाता।
शायर इस शेर में सच्चे इश्क़ के घटते दौर पर एक गहरा अफ़सोस जता रहा है। फ़रहाद और मजनूँ जैसे दीवाने अपने समर्पण और जूनून में बेमिसाल थे, लेकिन उनके जाने के बाद अब कोई उस शिद्दत और गहराई से प्यार नहीं करता। दुनिया की इस सतही भीड़ में शायर को ऐसा कोई हम-सफ़र नहीं दिखता जो इश्क़ के इस मुश्किल रास्ते पर उसके दिल की बराबरी कर सके।
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