भरी है अंजुमन लेकिन किसी से दिल नहीं मिलता हमीं में आ गया कुछ नक़्स या कामिल नहीं मिलता

“The assembly is crowded, yet my heart connects with none; has some flaw crept into me, or is there no perfect one?”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

महफ़िल लोगों से भरी हुई है मगर किसी से दिल नहीं मिलता। या तो हम में ही कोई कमी आ गई है, या फिर कोई मुकम्मल इंसान ही नहीं मिलता।

विस्तार

यह शेर भरी महफ़िल के बीच महसूस होने वाले उस अकेलेपन को बयां करता है, जिससे हम सब कभी न कभी गुज़रते हैं। शायर चारों तरफ लोगों की भीड़ तो देखता है, मगर उसका दिल किसी से नहीं जुड़ पाता; वह खुद से ही सवाल करता है कि क्या यह उसकी अपनी कोई कमी है या फिर दुनिया में ही कोई सच्चा और मुकम्मल इंसान नहीं बचा। यह आत्म-मंथन और रूहानी तलाश का एक बेहद खूबसूरत और दर्दभरा इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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