यूँ तो आया है तबाही में ये बेड़ा सौ बार पर डराती है बहुत आज भँवर की सूरत

“A hundred times before has this vessel plunged into ruin; yet frightful beyond measure is the face of the whirlpool today.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

यूँ तो यह नाव पहले भी सौ बार तबाही के कगार पर आई है, लेकिन आज भँवर का रूप बहुत डरा रहा है।

विस्तार

शायर अपनी ज़िंदगी या दिल को एक ऐसी कश्ती की तरह देखते हैं जो पहले भी सैकड़ों तूफानों और तबाहियों से गुज़र चुकी है। इंसान बड़े से बड़े गम झेल लेता है, लेकिन कभी-कभी ज़िंदगी में कोई संकट ऐसा आता है जिसकी सूरत देखकर सारा हौसला डगमगाने लगता है। यह शेर उसी गहरे ख़ौफ़ और बेचैनी को बयां करता है, जहाँ आज का भँवर पहले के हर तूफ़ान से कहीं ज़्यादा जानलेवा और ख़तरनाक महसूस हो रहा है।

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