शौक़ में उस के मज़ा दर्द में उस के लज़्ज़त नासेहो उस से नहीं कोई मफ़र की सूरत

“There is joy in longing for the beloved, and in that pain a sweet delight; O counselor, from this devotion there is no escape in sight.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

महबूब के शौक़ में मज़ा है और उसके दिए दर्द में भी लज़्ज़त है; ऐ नसीहत करने वालो, इससे बचने या भागने का कोई रास्ता नहीं है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ मोहब्बत के उस मीठे विरोधाभास को बयां कर रहा है, जहाँ चाहत में एक अनोखा सुरूर और हिज्र के दर्द में भी अद्भुत लज़्ज़त महसूस होती है। दुनिया के अक़लमंद सलाहकार या 'नासेह' हमेशा इस आग से बचने और दिल को संभालने की सीख देते हैं। मगर शायर मुस्कुराते हुए कहता है कि इस जज़्बे से छूटने का अब कोई रास्ता नहीं बचा, क्योंकि जब तकलीफ़ ही इंसान का सुकून बन जाए तो भला कोई इससे रिहाई क्यों चाहेगा?

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