उम्र की मंज़िल तो जूँ तूँ कट गई मरहले अब देखिए पेश आएँ क्या

“The journey of this life was somehow passed and done; now let us see what trials ahead are yet to come.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

ज़िंदगी का सफ़र तो जैसे-तैसे बीत गया, अब देखना यह है कि आगे कौन से पड़ाव या मुश्किलें सामने आती हैं।

विस्तार

इस शेर में ज़िंदगी की जद्दोजहद से थके हुए एक इंसान की गहरी टीस और बेबसी झलकती है। 'जूँ तूँ' लफ़्ज़ में यह भाव छुपा है कि दुनियावी ज़िंदगी जैसे-तैसे, तमाम दुखों और समझौतों के साथ कट तो गई। मगर इसके ख़त्म होने पर भी मुकम्मल सुकून नहीं मिलता, बल्कि दिल में यह खटका रहता है कि आगे—चाहे वह मौत हो या आख़िरत—कौन से नए इम्तिहान पेश आने वाले हैं। यह शेर जीवन की अनिश्चितता और इंसान के कभी न ख़त्म होने वाले सफ़र का आईना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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