गली-गली में बेचैनी की-अंधी दीवार बन घूमी वह ग़ज़ल।
“In street after street, of restlessness-A blind wall, that ghazal wandered.”
— अमृत घायल
अर्थ
यह ग़ज़ल हर गली में बेचैनी की अंधी दीवार बनकर घूमी। यह उद्देश्यहीन भटकती रही, बेचैनी के फैले हुए अहसास को अपने अंदर समेटे हुए।
विस्तार
ये शेर बहुत गहरा है। शायर कह रहे हैं कि वो ग़ज़ल सिर्फ़ बेचैनी की बात नहीं करती, बल्कि वो ख़ुद एक 'अंधी दीवार' बन गई है। यानी, ये बेचैनी इतनी फैली हुई है कि यह गली-गली में, हर नुक्कड़ पर महसूस हो रही है। यह एहसास है कि ग़म या बेचैनी को रोकना नामुमकिन है।
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