दिल-आज़ारी ने तेरी कर दिया बिल्कुल मुझे बे-दिल न कर अब मेरी दिल-जूई कि दिल-जूई से क्या हासिल

“Your torment has left me utterly bereft of heart; console me no more now, for what can soothing impart?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

तुम्हारी दिल दुखाने की आदत ने मुझे पूरी तरह बेदिल (निराश और टूटा हुआ) कर दिया है। अब मेरी दिलजोई मत करो, क्योंकि अब इस तसल्ली से क्या हासिल होगा।

विस्तार

इस शेर में 'दिल' लफ़्ज़ का बहुत ही ख़ूबसूरत और दर्द भरा खेल है—दिल-आज़ारी, बे-दिल और दिल-जूई। शायर कहता है कि महबूब के दिए ज़ख़्मों ने उसे इतना तोड़ा कि अब उसके सीने में दिल ही नहीं बचा, वह पूरी तरह 'बे-दिल' यानी बेजान हो चुका है। जब दिल ही बाक़ी न रहा, तो अब झूठी तसल्ली या हमदर्दी जताने का क्या फ़ायदा? यह दर्द की उस इंतहा को बयां करता है जहाँ इंसान की तकलीफ़ अब बेअसर और ख़ामोश हो चुकी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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दिल-आज़ारी ने तेरी कर दिया बिल्कुल मुझे बे-दिल | Sukhan AI