न होवे जब तलक इंसाँ को दिल से मेल-ए-यक-जानिब 'ज़फ़र' लोगों के दिखलाने को यकसूई से क्या हासिल

“Unless the heart itself inclines toward a single devotion true, / What is gained, Zafar, by displaying single-mindedness to the public view?”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जब तक इंसान का दिल सच्चे तौर पर किसी एक ओर न झुके, ऐ ज़फ़र, सिर्फ़ लोगों को दिखाने के लिए एकाग्रता या निष्ठा का दिखावा करने से क्या हासिल?

विस्तार

बहादुर शाह ज़फ़र इस शेर में दिखावे और सच्ची निष्ठा के फ़र्क़ को बड़े अपनेपन से समझाते हैं। वे कहते हैं कि जब तक दिल की गहराई से इंसान किसी एक दिशा या ध्येय की ओर समर्पित न हो, तब तक दुनिया की वाहवाही के लिए की गई एकाग्रता बिल्कुल बेमानी है। असल बात यह है कि बंदगी और प्यार अंदरूनी सच्चाई मांगते हैं; ज़ाहिरी तौर पर संजीदा दिखने से दिल का सूनापन नहीं भरता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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