“Yearning for a kiss from lips so sweet, my heart carried me off toward the shrine of Shakar Ganj.”
मीठे होंठों के चुंबन की चाहत में मेरा दिल मुझे हज़रत शकर गंज की मज़ार की तरफ़ ले गया।
यह शेर सांसारिक इश्क़ और रूहानी अक़ीदत का एक बेहद हसीन और दिलचस्प संगम है। आशिक़ अपने महबूब के मीठे लबों के बोसे की तमन्ना कर रहा था, लेकिन मिठास की इसी तलब में उसका दिल उसे मशहूर सूफ़ी संत हज़रत बाबा फ़रीद 'शकर गंज' (शक्कर का ख़ज़ाना) की मज़ार पर ले गया। शायर ने यहाँ लफ़्ज़ों की जादूगरी से बड़ी ख़ूबसूरती से दिखाया है कि कैसे हुस्न की चाहत कभी-कभी इंसान को सीधे रूहानियत की चौखट पर पहुँचा देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
