जिस दम 'ज़फ़र' ने पढ़ के ग़ज़ल हाथ से रखी आँखों पे रख हर एक सुख़न-संज ले चला

“The moment Zafar recited his ghazal and set it down from his hand, every connoisseur of verse pressed it reverently to their eyes and carried it away.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

जिस पल ज़फ़र ने अपनी ग़ज़ल पढ़कर हाथ से नीचे रखी, शायरी की परख रखने वाला हर शख़्स उसे आदरपूर्वक अपनी आँखों से लगाकर ले गया।

विस्तार

इस ख़ूबसूरत शेर में बहादुर शाह 'ज़फ़र' अपनी शायरी के जादू और मुशायरे के जीवंत माहौल को बयां कर रहे हैं। वे कहते हैं कि जैसे ही उन्होंने अपनी ग़ज़ल पढ़कर काग़ज़ हाथ से नीचे रखा, शायरी की समझ रखने वाले हर क़द्रदान ने उसे किसी पवित्र तोहफ़े की तरह अपनी आँखों से लगा लिया। किसी चीज़ को आँखों पर रखना बेपनाह इज़्ज़त और अक़ीदत की निशानी है, जो यह दिखाता है कि ज़फ़र के लफ़्ज़ों ने सुनने वालों के दिलों पर कैसा गहरा असर छोड़ा था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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