या मुझे अफ़सर-ए-शाहाना बनाया होता या मिरा ताज गदायाना बनाया होता

“Either You should have crowned me with an emperor's pride, / Or fashioned my diadem in a beggar's stride.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

या तो तूने मुझे शाही ताज बनाया होता, या फिर मेरा ताज किसी फ़क़ीर जैसा बनाया होता।

विस्तार

यहाँ शायर अपनी बेबसी को बयां करते हुए खुदा से गिला कर रहे हैं कि उन्हें या तो मुकम्मल सल्तनत और इख्तियार वाला बादशाह बनाया होता, या फिर एक ऐसा फकीर जिसकी झोली में दुनिया का कोई बोझ न होता। वे नाममात्र के ताज की जिल्लत से तंग आ चुके हैं, जहाँ रुतबा तो शाही है पर हाथ पूरी तरह बंधे हैं। यह शेर उस दर्दनाक कश्मकश की दास्तान है, जहाँ इंसान न तो अपनी शान बचा पाता है और न ही फकीरी के सुकून को पा सकता है।

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