ग़ज़ल

या मुझे अफ़सर-ए-शाहाना बनाया होता

یا مجھے افسر شاہانہ بنایا ہوتا
बहादुर शाह ज़फ़र· Ghazal· 9 shers· radif: बनाया होता

इस ग़ज़ल में शायर सांसारिक बुद्धि और चेतना के कष्टों पर अफ़सोस जताते हुए अपनी नियति से शिकवा करता है। वह कामना करता है कि काश उसे या तो राजसी वैभव मिलता, या फ़क़ीरी की बेफ़िक्री, या फिर इश्क़ में दीवाना बना दिया जाता ताकि वह समझदारी की पीड़ा से मुक्त रह पाता। इसका लहज़ा अस्तित्वगत दर्द और आत्ममंथन से भरा है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
या मुझे अफ़सर-ए-शाहाना बनाया होता या मिरा ताज गदायाना बनाया होता
या तो तूने मुझे शाही ताज बनाया होता, या फिर मेरा ताज किसी फ़क़ीर जैसा बनाया होता।
2
अपना दीवाना बनाया मुझे होता तू ने क्यूँ ख़िरद-मंद बनाया न बनाया होता
काश तूने मुझे अपने प्यार में दीवाना बना दिया होता। मुझे समझदार और अक़्लमंद क्यों बनाया, बेहतर होता कि मुझे ऐसा न बनाया होता।
3
ख़ाकसारी के लिए गरचे बनाया था मुझे काश ख़ाक-ए-दर-ए-जानाना बनाया होता
भले ही मुझे विनम्रता और खाक बनने के लिए ही पैदा किया गया था, काश कि मुझे मेरे महबूब की चौखट की धूल बनाया गया होता।
4
नश्शा-ए-इश्क़ का गर ज़र्फ़ दिया था मुझ को उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता
अगर मुझे इश्क़ का नशा सहने की क्षमता दी ही थी, तो मेरी ज़िंदगी का पैमाना इतना छोटा नहीं बनाया जाना चाहिए था।
5
दिल-ए-सद-चाक बनाया तो बला से लेकिन ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं का तिरे शाना बनाया होता
यदि ईश्वर ने मेरे दिल को सौ टुकड़ों में चीर ही दिया था तो कोई बात नहीं, काश उसने इसे तुम्हारी कस्तूरी जैसी खुशबूदार ज़ुल्फ़ों की कंघी बना दिया होता।
6
सूफ़ियों के जो न था लायक़-ए-सोहबत तो मुझे क़ाबिल-ए-जलसा-ए-रिंदाना बनाया होता
अगर मैं सूफ़ियों की सोहबत के लायक़ नहीं था, तो मुझे मतवालों और आज़ाद-ख़याल रिंदों की महफ़िल के ही क़ाबिल बना दिया होता।
7
था जलाना ही अगर दूरी-ए-साक़ी से मुझे तो चराग़-ए-दर-ए-मय-ख़ाना बनाया होता
अगर मुझे साक़ी की जुदाई में जलाना ही था, तो मुझे मयख़ाने की चौखट का चराग़ बना दिया होता।
8
शोला-ए-हुस्न चमन में न दिखाया उस ने वर्ना बुलबुल को भी परवाना बनाया होता
उसने बाग़ में अपने हुस्न का शोला नहीं दिखाया, वरना बुलबुल भी परवाना बनकर उस आग पर न्योछावर हो जाती।
9
रोज़ मामूरा-ए-दुनिया में ख़राबी है 'ज़फ़र' ऐसी बस्ती को तो वीराना बनाया होता
ऐ ज़फ़र, इस आबाद दुनिया में हर दिन कोई न कोई ख़राबी या तबाही होती रहती है; ऐसी बस्ती से तो बेहतर यह होता कि इसे वीराना ही बनाया गया होता।
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