दिल-ए-सद-चाक बनाया तो बला से लेकिन ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं का तिरे शाना बनाया होता

“So what if my heart was torn into a hundred shreds; would that He had shaped it into a comb for your musky tresses!”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

यदि ईश्वर ने मेरे दिल को सौ टुकड़ों में चीर ही दिया था तो कोई बात नहीं, काश उसने इसे तुम्हारी कस्तूरी जैसी खुशबूदार ज़ुल्फ़ों की कंघी बना दिया होता।

विस्तार

शायर कहता है कि अगर क़ुदरत ने मेरे दिल को सौ टुकड़ों में चीर ही दिया था, तो मुझे इस दर्द से कोई शिकायत नहीं थी। काश कि इन बिखरे हुए टुकड़ों को तेरे महकते, श्यामल बालों को संवारने वाली कंघी (शाना) बना दिया जाता! यहाँ दिल के चीथड़ों की तुलना कंघी के दंदानों से की गई है, जहाँ आशिक़ अपने टूटने और तबाह होने में भी सिर्फ़ महबूब का क़ुर्ब और स्पर्श पाना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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