नश्शा-ए-इश्क़ का गर ज़र्फ़ दिया था मुझ को उम्र का तंग न पैमाना बनाया होता

“If You had granted me the capacity to hold love's intoxicating wine, You should not have made the goblet of my life so narrow in design.”

— बहादुर शाह ज़फ़र
अर्थ

अगर मुझे इश्क़ का नशा सहने की क्षमता दी ही थी, तो मेरी ज़िंदगी का पैमाना इतना छोटा नहीं बनाया जाना चाहिए था।

विस्तार

इस शेर में शायर ख़ुदा से एक बेहद मासूम और गहरा शिकवा करता है कि अगर मुझे इश्क़ की असीम मस्ती को झेलने का हौसला और बड़ा दिल दिया था, तो फिर मेरी ज़िंदगी का प्याला इतना छोटा क्यों बनाया? यहाँ 'ज़र्फ़' (सहनशक्ति) और 'पैमाना' (जाम या उम्र की सीमा) के रूपक से जीवन की नश्वरता को उभारा गया है। शायर का दर्द यह है कि दिल में बेपनाह मोहब्बत समाने की जगह तो है, मगर उसे जीने के लिए वक़्त बहुत कम दिया गया।

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