“In my heart, I learned the lesson of love, / From the mosque to the river, the path is vast. / From the temple to the court, the struggle is great, / Where a thousand sounds resonate.”
मेरे दिल में मैंने इश्क़ का सबक सीखा, / मस्जिद से लेकर दरिया तक, राह बहुत विशाल है। / मंदिर से लेकर दरबार तक, संघर्ष बहुत बड़ा है, / जहाँ हज़ार ध्वनियाँ गूँजती हैं।
यह नज़्म बुल्ले शाह ने हमें प्रेम के सच्चे सबक सिखाती है। शायर कहते हैं कि इश्क़ का हर सबक किसी इमारत में नहीं, बल्कि जीवन की बहती धारा में मिलता है। यह निरंतर गूंजता हुआ नाद, एक शाश्वत कंपन है जो हर जगह व्याप्त है। यह हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की उपस्थिति हर कोने में है, और हमें उस दिव्य ताल को पहचानना चाहिए जो हमारे अस्तित्व को दिशा देती है।
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