Ved, Quran parh parh thakey
Sajdey kardiyaan ghis gaye mathey
Na Rab Tayrath, na Rab Makkeh
Jis paya tas nur anwaar
“Having recited the Vedas and the Quran until exhaustion,”
— बुल्ले शाह
अर्थ
वेद और कुरान पढ़कर थक गए, माथे पर सजदे रगड़ दिए। न ताइरथ के रब् हैं, न मक्के के रब् हैं, जिस पर नूर और अंबर का तेज पाया।
विस्तार
Bulleh Shah इस शेर में बाहरी दिखावे और आंतरिक सच्चाई के बीच का गहरा अंतर समझाते हैं। वे कहते हैं कि लोग वेदों का पाठ करके और सजदे करके थक गए हैं। शायर का इशारा है कि ईश्वर की प्राप्ति किसी मंदिर या तीर्थ स्थल पर नहीं होती। यह नूर तो बस उस प्रेम और रूहानी एहसास में है जो दिल में बसता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति का मार्ग आडंबर से नहीं, बल्कि दिल की तड़प से गुजरता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
