Sukhan AI
Gaya gayaan gal mukdee naheen
Pawain sow sow pand parrhaeeay

The wandering style, the sweet voice, is not present, The fragrance of the wind, the lovely dust, is scattered.

बुल्ले शाह
अर्थ

गया ग्यान कल मुकदी नहीं, पावन सो सो पंद परहाए। (अर्थ: वह भटकती हुई कला, मधुर वाणी, मौजूद नहीं है; हवा की सुगंध, प्यारा धूल कण बिखरा हुआ है।)

विस्तार

Bulleh Shah साहब ने यहाँ जीवन की एक बहुत गहरी बात कही है। वह कहते हैं कि कोई भी बात या कहानी पूरी तरह समझी नहीं जा सकती। जैसे हवा एक पंख को चारों ओर उड़ा देती है, वैसे ही बातें भी हवा में उड़कर दूर-दूर तक फैल जाती हैं। इस शेर में हमें यह सीख मिलती है कि कुछ बातें इतनी गहरी होती हैं कि उनका अर्थ समझना बहुत मुश्किल होता है।

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