“To him who understands in his own way, we explain accordingly; A deaf man grasps by signs, why then should we prattle needlessly, O gentle folk?”
जो जिस तरह समझता है, उसे उसी तरह समझाते हैं; बहरा तो इशारों से समझता है, तो फिर क्यों व्यर्थ की बातें करें?
यह दोहा हमें प्रभावी संचार की कला सिखाता है। यह सलाह देता है कि हमें लोगों को उसी तरह समझाना चाहिए जिस तरह वे समझते हैं, उनकी समझ और दृष्टिकोण के अनुसार अपनी बात रखनी चाहिए। जैसे अगर कोई कहानी से बेहतर समझता है, तो उसे कहानी सुनाएं। दूसरी पंक्ति इस बात को और स्पष्ट करती है: एक बहरा व्यक्ति संकेतों से समझता है, न कि लगातार बोलने से। तो फिर, हमें अनावश्यक शब्दों में क्यों उलझना चाहिए या बातों को बेवजह लंबा खींचना चाहिए? इसका सार यह है कि हमें स्पष्ट, संक्षिप्त और सुनने वाले की समझ का सम्मान करते हुए बोलना चाहिए। सरल बोलें, सीधा बोलें और हमेशा स्पष्टता का लक्ष्य रखें।
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
