“Each flower-bud, a single drop of blood, appears to be,Has one beheld a finger, bound with henna's artistry?”
हर गुलाब की कली खून की एक बूंद जैसी है। क्या किसी ने मेहंदी लगी हुई उंगली की नोक देखी है?
हर ग़ुंचा-ए-गुल सूरत-ए-यक-क़तरा-ए-ख़ूँ है, देखा है किसू का जो हिना-बस्ता सर-ए-अंगुश्त। Romanized pronunciation: Har ghuncha-e-gul surat-e-yak-qatra-e-khoon hai, Dekha hai kisu ka jo hina-basta sar-e-angusht. फूल की हर कली मुझे खून की एक बूंद जैसी लगती है क्योंकि मैंने किसी की मेहंदी लगी उंगलियों के पोर देखे हैं। यहाँ शब्द ग़ुंचा-ए-गुल का अर्थ है फूल की कली और हिना-बस्ता का मतलब है मेहंदी से रंगा हुआ जबकि सर-ए-अंगुश्त उंगली के पोर को कहते हैं। मेरे दोस्त, यहाँ ग़ालिब हमें यह बता रहे हैं कि मोहब्बत इंसान की नज़र को कैसे बदल देती है। जब हम किसी की सुंदरता के किसी एक हिस्से से बहुत गहराई से जुड़ जाते हैं, जैसे कि उनकी मेहंदी लगी लाल उंगलियां, तो वह छवि हमारी आँखों के सामने बैठ जाती है। अब ग़ालिब जब भी बाग में देखते हैं तो उन्हें फूल नहीं दिखते, बल्कि हर कली में वही लाल रंग और वही उंगली का पोर नज़र आता है। यह वह जुनून है जहाँ पूरी दुनिया बस एक इंसान की याद बन जाती है। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि कोई खास खुशबू आपको बरसों पुराने किसी लम्हे में ले जाए? यह वैसा ही है जैसे जब आप कोई नई चीज़ खरीदते हैं तो अचानक आपको पूरी दुनिया में वही चीज़ नज़र आने लगती है। हम दुनिया को वैसा नहीं देखते जैसी वह है, बल्कि वैसा देखते हैं जैसे हम खुद अंदर से हैं।
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