बेश अज़ नफ़स बुताँ के करम ने वफ़ा न की
था महमिल-ए-निगाह ब-दोश-ए-शरार हैफ़
“More than a breath, the idols' grace could not endure; Alas, the gaze's palanquin on a spark's shoulder, unsure!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मूर्तियों की कृपा ने एक साँस से ज़्यादा देर तक साथ नहीं दिया। अफ़सोस, नज़र की पालकी एक चिंगारी के सहारे थी।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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