किस वास्ते अज़ीज़ नहीं जानते मुझे
लअ'ल ओ ज़मुर्रद ओ ज़र ओ गौहर नहीं हूँ मैं
“Why is it that you don't hold me dear?Am I not ruby, emerald, gold, or pearl?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुम मुझे किस वास्ते (किसलिए) अज़ीज़ (प्यारा/कीमती) नहीं जानते? क्या मैं लाल, पन्ना, सोना और मोती नहीं हूँ?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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