रखते हो तुम क़दम मिरी आँखों से क्यूँ दरेग़
रुत्बे में महर-ओ-माह से कम-तर नहीं हूँ मैं
“Why do you shy from placing your steps on my eyes? In status, I am no less than the Sun and the Moon.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुम मेरे आँखों पर अपने कदम रखने से क्यों हिचकिचाते हो? मैं रुतबे में सूर्य और चंद्रमा से कम नहीं हूँ।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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