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दिल गुज़रगाह-ए-ख़याल-ए-मय-ओ-साग़र ही सही
गर नफ़स जादा-ए-सर-मंज़िल-ए-तक़्वी न हुआ

Let the heart be a thoroughfare for thoughts of wine and cup, no less,If the soul's breath became not piety's destined address.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

भले ही दिल शराब और प्याले के विचारों का मार्ग बने, अगर साँस धार्मिकता की अंतिम मंज़िल का रास्ता नहीं बन पाई।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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