Sukhan AI
हूँ तिरे वा'दा न करने में भी राज़ी कि कभी
गोश मिन्नत-कश-ए-गुलबाँग-ए-तसल्ली न हुआ

I am content even in your not promising, for neverDid my ear yearn for the sweet song of solace.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं तुम्हारे वादा न करने में भी राज़ी हूँ, क्योंकि मेरा कान कभी दिलासे के मधुर गीत का इच्छुक नहीं हुआ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.