किस से महरूमी-ए-क़िस्मत की शिकायत कीजे
हम ने चाहा था कि मर जाएँ सो वो भी न हुआ
“To whom shall I complain of destiny's cruel slight?I wished to die, but even that was denied my right.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं अपनी किस्मत की बदकिस्मती की शिकायत किससे करूँ? मैंने मरना चाहा था, पर वह भी न हो सका।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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