Sukhan AI
ब-जा है गर न सुने नाला-हा-ए-बुलबुल-ए-ज़ार
कि गोश-ए-गुल नम-ए-शबनम से पमबा-आगीं है

It is just if the distressed nightingale's wails it ignores,For the rose's ear is cotton-plugged by dew's moist stores.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

यह उचित ही है यदि गुलाब व्याकुल बुलबुल की चीखें न सुने, क्योंकि गुलाब का कान ओस की नमी से रुई से भरा हुआ है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.