पकड़े जाते हैं फ़रिश्तों के लिखे पर ना-हक़
आदमी कोई हमारा दम-ए-तहरीर भी था
“They seize us unjustly for what the angels have penned,Was any man of ours present when it was written then?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हमें फ़रिश्तों द्वारा लिखे गए कर्मों के आधार पर बेवजह पकड़ा जाता है। क्या लिखने के समय हमारा कोई आदमी वहां मौजूद था?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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