ग़ज़ल
जराहत-तोहफ़ा अल्मास-अर्मुग़ाँ दाग़-ए-जिगर हदिया
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغِ جگر ہدیہ
यह ग़ज़ल गहरे दुख और उत्कट लालसा को दर्शाती है, जिसमें पीड़ा को हृदय का एक अनमोल उपहार बताया गया है। यह बेचैन प्रतीक्षा और गहरी भावनात्मक उथल-पुथल की तीव्रता को चित्रित करती है, जहाँ उदासी गहराई से समाई हुई है। शायर की सहनशीलता भरी आत्मा पर प्रकाश डाला गया है, जिससे यह आभास होता है कि यह प्रिय के अभिमान को भी प्रभावित कर सकती है।
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1
जराहत-तोहफ़ा अल्मास-अर्मुग़ाँ दाग़-ए-जिगर हदिया
मुबारकबाद 'असद' ग़म-ख़्वार-ए-जान-ए-दर्दमंद आया
मेरे ज़ख़्म तोहफ़े हैं, मेरे हीरे जैसे दर्द नज़राने हैं, और जिगर के दाग़ हदिया हैं। मुबारक हो 'असद', क्योंकि इस दर्द भरी जान का ग़म-ख़्वार आ गया है।
2
जुनूँ गर्म इंतिज़ार ओ नाला बेताबी कमंद आया
सुवैदा ता ब-लब ज़ंजीरी-ए-दूद-ए-सिपंद आया
जुनून का गर्म इंतज़ार और बेचैन नाला एक फंदा बन गया। दिल के गहरे केंद्र (सुवैदा) से होंठों तक, सिपांड के धुएँ की एक जंजीर आ गई।
3
मह-ए-अख़्तर-फ़शाँ की बहर इस्तिक़बाल आँखों से
तमाशा किश्वर-ए-आईना में आईना-बंद आया
आँखों से तारों को बिखेरने वाले चाँद का स्वागत करने के लिए, दर्पणों के देश में एक दर्पण से सजा हुआ दृश्य प्रकट हुआ।
4
तग़ाफ़ुल बद-गुमानी बल्कि मेरी सख़्त-जानी से
निगाह-ए-बे-हिजाब-ए-नाज़ को बीम-ए-गज़ंद आया
मेरी उपेक्षा, बदगुमानी, और बल्कि मेरी सख्त-जान प्रकृति के कारण, नाज़ भरी बेपर्दा निगाह को भी नुकसान का डर महसूस हुआ।
5
फ़ज़ा-ए-ख़ंदा-ए-गुल तंग ओ ज़ौक़-ए-ऐश बे-परवा
फ़राग़त-गाह-ए-आग़ोश-ए-विदा'-ए-दिल-पसंद आया
गुलाब की हंसी का माहौल तंग महसूस होता है और सुख की इच्छा बेपरवाह है। इसलिए, विदाई की आगोश में मिलने वाला विश्राम-स्थल दिल को भा गया है।
6
अदम है ख़ैर-ख़्वाह-ए-जल्वा को ज़िंदान-ए-बेताबी
ख़िराम-ए-नाज़ बर्क़-ए-ख़िरमन-ए-सई-ए-सिपंद आया
अनुपस्थिति या लोप, सौंदर्य की अभिव्यक्ति का शुभचिंतक है, परंतु बेचैनी के लिए एक कारागार। उसके गर्व से भरी चाल ऐसे आई जैसे बिजली सिपांद के प्रयासों के ढेर पर गिरी हो, उन्हें नष्ट कर गई।
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