Sukhan AI
जिस बज़्म में तू नाज़ से गुफ़्तार में आवे
जाँ कालबद-ए-सूरत-ए-दीवार में आवे

In the assembly where you speak with charming grace,Life, in a body, takes a wall's unmoving place.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जब तुम किसी महफिल में नाज़ से बातें करती हो, तो सभी की जान एक दीवार की सूरत में बेजान हो जाती है, यानी वे स्तब्ध रह जाते हैं। उनकी जान एक दीवार की तरह जड़ हो जाती है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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