'अज़ीज़ो ज़िक्र-ए-वस्ल-ए-ग़ैर से मुझ को न बहलाओ
कि याँ अफ़्सून-ए-ख़्वाब अफ़्साना-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा है
“O friends, do not console me with the talk of rivals' unions,For here, the spell of sleep is like Zulaikha's dream-tale.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ दोस्तों, मुझे दूसरों के मिलन की बातों से मत बहलाओ, क्योंकि यहाँ नींद का जादू भी ज़ुलेख़ा के ख़्वाब की कहानी जैसा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
