नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का
काग़ज़ी है पैरहन हर पैकर-ए-तस्वीर का
“Whose playful script does the very image bemoan?For every pictured form, in paper robes is shown.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यह चित्र किसकी चंचल रचना की शिकायत कर रहा है, क्योंकि हर चित्रित आकृति का वस्त्र कागज़ का बना हुआ है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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