आगही दाम-ए-शुनीदन जिस क़दर चाहे बिछाए
मुद्दआ अन्क़ा है अपने आलम-ए-तक़रीर का
“Let awareness cast its net of hearing, however wide it may be spread,Mudda'a, the Anqa, is the goal of my world of speech, unled.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जागरूकता सुनने का जाल जितना चाहे उतना फैलाए, मेरे भाषण का असली उद्देश्य अन्क़ा पक्षी की तरह दुर्लभ और अगम्य है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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