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बस-कि हूँ 'ग़ालिब' असीरी में भी आतिश ज़ेर-ए-पा
मू-ए-आतिश दीदा है हल्क़ा मिरी ज़ंजीर का

Such is 'Ghalib's' fiery spirit, even in chains, my feet still burn,The links of my confinement, like fire-singed hair, quickly turn.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

चूँकि मैं ग़ालिब हूँ, इसलिए क़ैद में भी मेरे पैरों के नीचे आग है। मेरी ज़ंजीर के कड़े आग से झुलसे हुए बालों जैसे हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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