ये पिछले पहर का ज़र्द-रू चाँद
बे-राज़ ओ नियाज़-ए-आश्नाई
“The yellow-tinged moon of the last watch, Is a mystery and a plea for intimacy.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह पिछले पहर का पीला चाँद रहस्यमय और अपनेपन की चाहत का निमंत्रण है।
विस्तार
यह शेर समय, फीकी पड़ चुकी सुंदरता और अथक तड़प को बयां करता है। 'पिछले पहर का ज़र्द-रू चाँद' किसी पुरानी, धुंधली याद की तरह है, जो खूबसूरत तो है, पर अब अपने चरम पर नहीं है। फिर भी, शायर उस चाँद को देखते हुए भी 'आश्नाई' की नियाज़ मांग रहे हैं। यह अहसास दिलाता है कि कैसे हम अपनी बीती यादों और एक गहरे, चिरस्थायी रिश्ते के लिए तरसते हैं, भले ही वक़्त हमें कुछ और दे रहा हो।
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