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इस दुनिया में मुझे कहीं भी शरण नहीं मिली, और अगर मिली तो कहाँ मिली?
घर बर्बाद कारने वाले गुनाहों को माफ़ी का सहारा बस तेरी ईश्वरीय रहमत में मिला

In this world, I found no refuge anywhere, and even if I found it, where did I find it? Only in your divine mercy did I find the support for the sins that destroyed my home.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

इस दुनिया में मुझे कहीं भी कोई पनाह नहीं मिली, और अगर मिली भी तो कहाँ मिली? मेरे घर को बर्बाद करने वाले पापों के लिए माफ़ी का सहारा केवल तुम्हारी ईश्वरीय कृपा में ही प्राप्त हुआ।

विस्तार

यह शेर गहरी निराशा और पछतावे की भावना व्यक्त करता है। शायर कहता है कि उसे दुनिया में कहीं भी कोई सहारा या पनाह नहीं मिली। वह स्वीकार करता है कि उसने ऐसे गुनाह किए हैं जिन्होंने उसके अपने जीवन या 'घर' को बर्बाद कर दिया है। फिर भी, इस गहरे अपराधबोध और बेघर होने की भावना के बीच, आशा की एक किरण है। उसे अपने विनाशकारी कामों के लिए माफ़ी सिर्फ़ ईश्वर की रहमत में ही मिल सकती है। यह ईश्वर से दया और क्षमा याचना की एक मार्मिक पुकार है, क्योंकि उसे दुनियावी सुकून नहीं मिला और केवल आध्यात्मिक कृपा ही उसे मुक्ति दिला सकती है।

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