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वो मुल्तफ़ित हों तो कुंज-ए-क़फ़स भी आज़ादी
न हों तो सेहन-ए-चमन भी मक़ाम-ए-मजबूरी

If they are benevolent, even the cage-bower is freedom, But if not, even the garden-mind is a place of compulsion.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यदि वे दयालु हों, तो पिंजरे का कोना भी आज़ादी है; अन्यथा, बगीचे का मन भी मजबूरी की जगह है।

विस्तार

यह शेर उस गहरे अहसास को बयां करता है कि इंसान की तसल्ली, उसकी निगाहों में होती है। शायर कहते हैं कि जब कोई हमारा मुल्तफ़ित होता है, तो क़ैद भी आज़ादी लगती है। लेकिन जब वो निगाहें हट जाती हैं, तो खुली जगह भी, जैसे कि कोई मक़सद हो, मजबूरी लगती है। यह शेर हमें बताता है कि किसी की नज़रों का जादू कितना गहरा होता है।

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