हकीम ओ आरिफ़ ओ सूफ़ी तमाम मस्त-ए-ज़ुहूर
किसे ख़बर कि तजल्ली है ऐन-ए-मस्तूरी
“O physician, O sage, O Sufi, all you intoxicated by the Divine Presence, Who knows that the manifestation is the very essence of intoxication.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
हे वैद्य, हे ज्ञानी, हे सूफ़ी, सभी जो दिव्य उपस्थिति के मदहोश हैं, कौन जानता है कि यह प्रकटीकरण स्वयं मदहोशी का सार है।
विस्तार
यह शेर सूफ़ी दर्शन का एक गहरा तड़का है। शायर यहाँ हकीम, आरिफ़ और सूफ़ी—हर उस खोजकर्ता को संबोधित कर रहे हैं जो रूहानी नूर की तलाश में है। वह पूछते हैं कि क्या आप यकीन कर सकते हैं कि जो अलौकिक नज़ारा आप देख रहे हैं, वह वास्तव में कोई अटल सत्य है? या बस एक मदहोश नज़र का भ्रम है? यह शेर हमें बताता है कि सच्चाई अक्सर हमारे अपने नज़रिया से गुज़रती है।
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