सुने न साक़ी-ए-महवश तो और भी अच्छा
अयार-ए-गरमी-ए-सोहबत है हर्फ़-ए-माज़ूरी
“If the cupbearer does not sing of the beloved, then even better, for the lover's delight is in the mere word of separation.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर साक़ी-ए-महवश (प्यार का प्याला पिलाने वाला) महबूब की बातें न गाए, तो और भी अच्छा है, क्योंकि आशिक़ का मज़ा तो जुदाई के बस एक शब्द में है।
विस्तार
यह शेर उस नशे की बात करता है, जो महफ़िल में होता है। शायर कह रहे हैं कि किसी से शिकायत करना ज़रूरी नहीं है। यह जो महफ़िल है, यह जो संगत है, इसका अपना एक नशा है। इतना नशा है कि अगर साक़ी को हमारी आहें सुनाई भी दें, तो कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। बस मौजूदगी ही काफ़ी है।
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