मिस्ल-ए-कलीम हो अगर मारका आज़मा कोई
अब भी दरख़्त-ए-तूर से आती है बाँग-ए-ला-तख़फ़
“If anyone tries the might of Kalim, From Mount Tur still comes the cry of 'La-Takhaff.'”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यदि कोई कलीम की शक्ति का प्र험 करे, तो आज भी तूर पर्वत से 'ला-तक़फ़' की ध्वनि आती है।
विस्तार
यह शेर हमें हक़ीक़त की अमरता और सच्चाई के स्थायी होने का संदेश देता है। शायर कहते हैं कि अगर कोई भी 'महबूब' के दर्जा को परखने की हिम्मत करे... तो भी दरख़्त-ए-तूर से आती हुई वो आवाज़.... वो सच्चाई की पुकार, अब भी गूँज रही है। यह एक ऐसा बयान है जो बताता है कि कोई भी चुनौती उस अटल सत्य को बदल नहीं सकती।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
