सोहबत-ए-पीर-ए-रूम से मुझ पे हुआ ये राज़ फ़ाश
लाख हकीम सर-ब-जेब एक कलीम सर-ब-कफ़
“From the company of the Pir-e-Rum, this secret was revealed to me; A million healers, with heads of coin, and one true word, with heads of hands.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
पीर-ए-रूम की संगत से मुझ पर यह रहस्य खुल गया; लाखों वैद्य सिर पर पैसे वाले, और एक सच्चा कलीम सिर पर हाथ वाले।
विस्तार
यह शेर ज्ञान और समझ के गहरे अंतर को समझाता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि सिर्फ़ जानकारी इकट्ठा करना या पैसा होना काफी नहीं है। असली समझ, जो ज़िंदगी को दिशा देती है, वह केवल सच्चे ज्ञान और गहरे विचार से आती है—जैसे एक सच्चे कलीम (ज्ञानी) के पास होता है। शायर बताते हैं कि बाहरी दिखावे से ज़्यादा ज़रूरी, सच्चाई का ज्ञान होता है।
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